Problem Kya hai? प्रॉब्लम, प्रॉब्लम ये है कि वो लड़की है. और क्या प्रॉब्लम है. प्रॉब्लम ये है कि मैं चाहता हूं कि मेरी ल...
Problem Kya hai?
प्रॉब्लम, प्रॉब्लम ये है कि वो लड़की है. और क्या प्रॉब्लम है. प्रॉब्लम ये है कि मैं चाहता हूं कि मेरी लाइफ में कोई प्रॉब्लम ही न हो. लेकिन अगर मेरी लाइफ में कोई प्रॉब्लम न हो, तो ये उसकी लाइफ की सबसे बड़ी प्रॉब्लम है. और वो चिंता क्यों कर रही है? उसे तो सेलिब्रेट करना चाहिए. क्योंकि यही सब तो वो चाहती थी. सीरियसली, आजकल जब वो मुंह खोलती है, तो मन करता है कि उसके मुंह में ही कुछ ठूंस दूं. यकीन करो मेरा, छह महीने में मैंने सब झेल लिया. सब देख लिया. कौन सा प्यार, कैसी रिलेशनशिप, कैसी खुशियां. रिलेशनशिप का मतलब ही होता है, अपनी खुशियों के साथ आएं. क्योंकि उसके बाद आपको सिर्फ चिंता रहेगी, उसकी खुशियां, उसका बर्थडे, उसके कुत्ते का बर्थडे, उसका न्यू ईयर जो कभी तुम्हारा भी न्यू ईयर था.
इन लड़कियों को न कोई खुश नहीं रख सकता. हैप्पी विमेन एक झूठ है. बैटमेन वाली को ही देख लो. जबतक बैटमेन नहीं बना, कहती रही, तुम तो कुछ करते नहीं हो. नकारा हो, नपुंसक हो. मैं तुम जैसे इंसान के साथ कैसे रह सकती हूं? जिस दिन बेचारा बैटमेन बन गया, उस दिन बोली, तुम तो बैटमेन बन गए. अरे मुझे तो एक नॉर्मल इंसान चाहिए था. मैं तुम्हारे साथ कैसे रह सकती हूं. सब साला न कहानियों का दोष है. ये बॉलीवुड रोमेंटिक मसाला. एक लड़का-एक लड़की. दोनों को प्यार हुआ. दोनों साथ-साथ. फिल्म खतम. उसके बाद की स्टोरी कोई नहीं बताता. उसके बाद की कहानी मैं बताता हूं.
इसके बाद लड़के ने लड़की को दो दिन नहीं हग किया तो प्रॉब्लम. हग किया तो चेप हो रहे हो, इतना भी अच्छा नहीं लगता. शॉपिंग खत्म नहीं होती इनकी. पहले कुशन आए. फिर कर्टन आए. फिर कुशन कर्टन से मैच नहीं हुए, तो और कुशन आए. साले मग इतने हैं मेरे यहां कि उन्हें बेचने जाऊं तो, महीने का खर्चा निकल आए. एक तो जो चीज खरीदने जाएंगी, वो चीज खरीद के नहीं आएंगी. दो हफ्ते दिमाग चांटेगी, टेबल लेना है, टेबल लेना है. पांच घंटे मॉल में बिताके एक सड़ी सी चप्पल लेकर आ जाएंगी. फिर अगले दो हफ्ते दिमाग चांटेंगी, टेबल लेना है-टेबल लेना है.
ऑफिस में काम कर रहा हूं, फोन आ जाएगा. फोन उठाते ही बोल देता हूं, बात नहीं कर सकता. कितना मुश्किल है ये बात समझना. दो मिनट बात कर लोगे तो क्या हो जाएगा? अरे दो मिनट कर लूंगा, तो तुझे क्या मिल जाएगा मेरी मां? क्योंकि ठीक से तो कर पाऊंगा नहीं. उसके बाद आई लव यू बोले बिना फोन काटा, तो नाटक. सबसे ज्यादा दिमाग की दही इस मोबाइल फोन ने की है. कतई घटिया अविष्कार है. षड्यंत्र है. पट्टा है साला पट्टा.
एक तो उनके ऐड भी देखो न. एक पैसा प्रति सैकेंड. और फोन करो, और फोन करो. अरे कॉल सस्ती हो जाने से बात थोड़ी न बढ़ जाती है करने को. फिर इसका जवाब उन्हें भी दो. कि तुम्हारे पास बात क्यों नहीं है करने को? तुम्हारा इंटरेस्ट मुझमें खत्म हो रहा है. तुम्हें हम्म, हम्म ही करना था, तो तुम्हें मैंने फोन ही क्यों किया? अरे मेरी मां, मुझे क्या पता तुने मुझे क्यों फोन किया? जा जाके भारती मित्तल से पूछ न. उस ऐड में न, वो कुत्ता नहीं कुतिया है. सीरियसली. शर्त लगा सकता हूं. आप जहां भी जाओगे. हम पीछे आएंगे.
तुझे क्या लगता है कोलम्बस को पता नहीं था कि वो इंडिया आ रहा है. वो गलती से पहुंच गया. नहीं उसको पता था. वो बेचारा तो कहीं दूर जाना चाहता था. बीवी के चक्कर में बोलना पड़ा इंडिया जा रहा हूं. नहीं तो दस सवाल पूछती, कहां जा रहे हो? क्यों जा रहे हो? अच्छा तुम्हें पता भी नहीं कहा जा रहे हो. सीधे-सीधे क्यों नहीं बोलते मुझसे कहीं दूर जाना चाहते हो. आजतक बेचारे का मजाक उड़ाती है दुनिया.
ऑफिस में काम कर रहा हूं मैसेज आ जाएगा आई लव यू. तो मैं भी एसएमएस कर देता हूं, आई लव यू टू. इसके बाद एसएमएस पर एसएमएस शुरू. अबे काम क्या करती है ऑफिस में. दो एसएमएस के रिप्लाई मत करना तुरंत फोन आएगा. फोन मत उठा, तो दस मिनट में मैसेज आ जाएगा, मुझे नहीं लगता कि ये (रिलेशनशिप) काम कर रहा है. 10 मिनट में बाबू आई लव यू से मुझे नहीं लगता कि ये काम कर रहा है. और ये सब तब जबकि वो डाउन भी नहीं होतीं.
अब पता चला कि ये आदमियों को इतने हार्ट अटैक क्यों आते हैं और ये गे बंदे इतने सक्सेसफुल क्यों होते हैं. क्योंकि इनके पास लड़कियां नहीं होती, जो उनकी खुशियां बर्बाद कर सकें. लोग कहते हैं न कि हर सफल लड़के के पीछे एक लड़की होती है. सच. लेकिन कोई ये नहीं बताता कि एक असफल लड़के के पीछे भी एक लड़की होती है. और ये तो कोई भी बता सकता है न कि असफल लोगों की तादात सफल लोगों से कई गुना ज्यादा है इस दुनिया में.
साला ऑफिस में काम कर रहा हूं. कह रहा हूं कि लेट हो जाऊंगा. तो खाना नहीं खाएगी. फिर भूखी सो जाएगी. अरे मैं कह रहा हूं खा लो, तो दिक्कत. क्या करूं? नौकरी छोड़ दूं? फिर साले, घर जाओ, इन्हें मनाओ, इन्हें खिलाओ इनके बाद खुद की भूख तो वैसे ही मर जाती है. इस सबके बाद भी इंसान किसी तरह कोने में जाकर शांति से बैठा हुआ है, न चुपचाप, तो घड़ी-घड़ी, क्या सोच रहे हो? क्या सोच रहे हो? क्या सोच रहे हो? अरे कुछ नहीं सोच रहा मेरी मां. ये सोच रहा हूं कि तेरा मुंह कैसे बंद करूं. क्या सोच रहा हूं? कैमरा लगा दूं क्या दिमाग में?
इस सबके बाद, हम कभी बात नहीं करेंगे, हमें बात करने की जरूरत है. मुझे नहीं लग रहा कि अब ये रिलेशनशिप काम कर रहा है. मैं तुझे बता रहा हूं. औरत के साथ कुछ डिस्कस नहीं कर सकते. क्योंकि वो इसे डिस्कशन कहेंगी, लेकिन औरत के साथ हर डिस्कशन बहस बन जाता है. और बहस में तो बॉस तू उनसे जीत ही नहीं सकता. क्योंकि हम आदमियों की एक बेसिक नीड होती है, कि बहस में सेंस होना चाहिए. लेकिन लड़कियों को कोई फर्क नहीं पड़ता. सेंस जैसी बेकार सी चीज की वजह से वो किसी बहस में कैसे हार जाएं? तो आज की बात पर आज आर्ग्यूमेंट होगा ही नहीं. आज की बात पर झगड़ा होगा दो महीने बाद. यहां साला याद भी नहीं होता है कि दो महीने पहले हुआ क्या था?
लड़कियां बचाकर रखती हैं, ये छोटा हथियार नहीं बढ़ा हथियार है. इसे बड़ी लड़ाई में यूज करेंगे. तू कभी ट्राई कर लियो खुद को सही साबित करने का, तू अपनी बात को साबित कर लेगा, लेकिन तभी आवाज आएगी. उंगली नीचे करो. तूने ध्यान भी नहीं दिया होगा, लेकिन तेरी एक नादान सी उंगली उनकी तरफ पॉइन्ट कर रही होगी और तभी अचानक से पूरा आर्ग्यूमेंट गटर में चला जाएगा और मुद्दा ये रह जाएगा कि तुम मुझे उंगली कैसे दिखा सकते हो? किसने बनाया ये रूल? साला किसने. वो बीच आर्ग्यूमेंट में तुम्हें जूता फेंक के मार दे, तो कोई दिक्कत नहीं. लेकिन तुम अगर उनकी तरफ एक उंगली पॉइन्ट कर दो, तो सारा मुद्दा खतम.
वो सही तुम गलत. शादी के पहले वो नागिन बीन क्यों बजती है? क्योंकि बैंड वाला भी तुम्हें चेतावनी दे रहा होता है कि कौन आ रहा है तुम्हारी जिंदगी में. इनका सिग्नेचर ट्यून है ये. वो क्यों आई थी तेरे पास यहां? अगर यही चीज मैं करूं तो. मैं उसकी किसी दोस्त को कॉल करके, अपनी प्रॉब्लम गिनाऊं तो? फिर कहेगी अच्छा तुमने मेरी फ्रैंड को कॉल किया. तुम उनकी सिंपथी हासिल करना चाहते हो. उसके साथ सो क्यों नहीं जाते. बहुत ही घटिया है ये.
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