VPN यानी Virtual Private Network को जल्द ही भारत में बैन किया जा सकता है। वीपीएन का इस्तेमाल दुनियाभर में लाखों लोग करते हैं। इंटरनेट पर स...
VPN यानी Virtual Private Network को जल्द ही भारत में बैन किया जा सकता है। वीपीएन का इस्तेमाल दुनियाभर में लाखों लोग करते हैं। इंटरनेट पर सुपक्षित कम्युनिकेशन और फाइल ट्रांसफर के लिए Virtual Private Network का इस्तेमाल एक प्रभावी टूल के रूप में किया जाता है। भारत में इस सर्विस का इस्तेमाल कई कंपनियां करती है। इसका इस्तेमाल कंपनियां अपने नेटवर्क और डिजिटल असेट्स को हैकर्स से बचाने के लिए करती हैं।
भले ही VPN के प्रभावी टूल हो, लेकिन इसके सार्वजनिक इस्तेमाल को लेकर नई बहस सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, होम अफेयर्स की पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी चाहती है कि भारत सरकार देश में VPN सर्विस को बैन कर दे। रिपोर्ट के मुताबिक, कमेटी ने कहा है कि Virtual Private Network (VPN) साइबर खतरों और अन्य नापाक गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए एक खतरा है।
कमेटी के मुताबिक, वीपीएन ऐप और टूल आसानी से ऑनलाइन उपलब्ध हैं और ये अपराधियों को ऑनलाइन छिपने में मदद करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कमेटी ने सुझाव दिया है कि देश में वीपीएन सर्विस में बैन कर देना चाहिए। इसके साथ ही कमेटी चाहती है कि मंत्रालय ट्रैकिंग और सर्विलांस मैकेनिज्म को मजूबत करने के लिए ठोस कदम उठाए। आइए जानते हैं VPN में ऐसा क्या है जो पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी इसके खिलाफ सख्त कदम की मांग कर रही है।
क्यों हो रही VPN BAN की मांग?
- पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी चाहती है कि वीपीएन और डार्क वेब के इस्तेमाल की जांच की जाए।
- ऐसा माना जाता है कि वीपीएन टूल का इस्तेमाल गैर-कानूनी कामों के लिए किया जाता है।
- वीपीएन को आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है। बहुत से वेबसाइट्स ऐसी सुविधाएं मुहैया करा रही है और इसका प्रचार कर रही हैं।
- वीपीएन सर्विस और डार्क वेब आसानी से साइबर सिक्योरिटी को पार कर सकते हैं और इनकी मदद से अपराधी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अनजान शख्स बने रहते हैं।
- बहुत से फ्री और सस्ते वीपीएन मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल गलत कामों के लिए किया जा रहा है। ये हमारे डेटा को छिपाने के बजाय इक्ट्ठा करके एक्सपोज करने का काम कर रहे हैं।

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